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ग्राम पंचायत मखुरपानी में कच्चे मकान में रहने को मजबूर पहाड़ी कोरवा, 2 वर्षों से अधुरा है पीएम आवास का मकान।

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छत्तीसगढ़ के जिले कोरबा के विकासखंड आने वाले दूरस्थ वनांचल में बसे ग्राम पंचायत माखुरपानी में आवास की जगह पीएम के अरमानो पर पानी फेरने का काम किया जा रहा है. इतना ही नहीं जिम्मेदार हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं. पूरे मामले मे राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले कोरवा जनजाति के लोगों के हक पर डाका डाला गया, ग्राम पंचायत माखुरपानी ग्राम भोकलीभाटा एवं बाघामारा जहां पर लगभग 29 परिवार पहाड़ी कोरवा कई सालों से रह रहे हैं, जंगल में बसे हुए राष्ट्रपति के दत्तक पुत्रों की है बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीवन यापन कर रहे, गौर करने वाली बात यह है कि पहाड़ी कोरवा के लोगों ने प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत बनाने वाले पक्के मकान को लेकर फार्म भरा गया था, लेकिन 29 परिवारों में सिर्फ आठ ही परिवारों को आवास का लाभ मिला लेकिन वह भी अधूरा यहां रहने वाले ऐसे भी परिवार जो अधूरे आवाज में सीमेंट सीट लगाकर अपना जीवन यापन कर रहे हैं, कई आवास अधूरे पढ़े हुए हैं, गांव के ही कुछ बिचौलियों द्वारा आवास बनाने को लेकर भोले भाले पहाड़ी कोरवा के लोगों को अपने झांसे में लेकर हितग्राहियों की रकम को बंदरबांट कर दिया आधा अधूरा निर्माण हुआ ग्रामीण आवास पूरा होने का इंतजार कर रहा है। यहां के पात्र हितग्राहियों का आवास क़रीब दो सालों से अधूरा हैं। हालांकि फर्जी जीओटेक कर आवास की रकम को बिचौलियों ने डकार लिया। प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना में इस क़दर गोल माल किया गया कि जंगलों में रहने वाले पहाड़ी कोरवा आज भी सीमेंट सीट और लकड़ी से छत बना कर अपना गुजर बसर कर रहे हैं। पहाड़ी कोरवा द्वारा अधूरे आवास को लेकर जिला प्रशासन कई बार अवगत कराया जा चुका लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। केन्द्र सरकार ने हर ग्रामीण को पक्का मकान देने की कवायद कर रही है लेकिन अधिकारी की उदासीनताऔर बिचौलियों के कारगुज़ारी की वज़ह से राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले पहाड़ी कोरवाओं का आवास का सपना सिर्फ सपना ही रह गया। वनांचल क्षेत्र में बसे भोले भाले ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं कहने को इन्हें राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहा जाता है लेकिन सुविधाओं के नाम पर हाथ खाली है।

Jitendra Dadsena

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